कुछ कहने के लिये आजकल लफ्ज नहीं मिलते..
कुछ मिलके भी हमसे यहां रोज बिछडते..
तन्हाइयो मे यादो के मेले रोज ही लगते
कभी आन्शू छलकते तो कभी खामोशी बिखरते
अजीब है रीत दुनियावालो की जो आज है वो कल बन जाया करते..
मुस्किल यही कल मे ही हम सदिया बिताया करते..
आज जो है उसे खो क्युं हम दिया करते..
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
रविवार, 25 जनवरी 2015
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