वहम हो गया था इस दिल को तेरी दोस्ती का..
तेरे संग तेरे लिये कभी जीने का..
खबर ना थी कोई होता नही यहां किसी का..
हर इक लम्हे दर्द देने लगे जिसे समझी कभी पल चाहतों का..
क्या थी तेरी खवाइश मुझे तु इतना ही बता देता..
आरजू तेरी पुरी होती अगर मौत भी तू मांग बैठता..
कशमकश मे दिल तो आज तेरी चाहत मे न उलझा होता..
भूलना शायद मुमकिन हो न हो तेरे संग बिताये उन लम्हो का..
इतना खुद्गर्ज दिल देख के बरस रहे मेरे नैना..
धुल जाये काश वो यादें भी जो तड़पा रहे दिल को बेपनाह..
जो थे इन्तेजार किसी के दिदार के नैनो को खतम हुये यहां..
हर वहम मिट गया मेरे मिट जाने के बाद..
कोई तकलीफ़ न होगी तुझे हम नही आयेगे तेरे राहो मे आज के बाद..
खुशी तुझे मुबारक ग़म से हम रहेगे आबाद..
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
शुक्रवार, 20 मार्च 2015
वहम
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