ओ मेरे मालिक तेरी मरज़ी के आगे मेरी अर्जी क्यू झूठी है
तू सुनता क्यू नही तेरी बेरहमी के आगे मेरी फरियादे छोटी है..
तेरा नाम इतना बडा फिर क्यू तेरी रहमत छोटी है
मुझे टुकडो मे तोड़कर कैसी तेरी खुदाइ है
देख कभी यहा पल पल जिन्द्गी मर रही है
खामोश तु जबसे है तेरे दर पे रोती रही मेरी मुकदर है
कुछ फरियादे तो कुछ शिक्वे ना जाने कबसे लिये सब खडे है
गुजारिश मेरी इतनी नैनो मे कोई खवाब पल ना पाये जब्तक सांसो का आना जाना बाकी है
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015
मेरी अर्जी
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