सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

बिते लम्हे दर्द देते रहे

भुला दी तुमने मेरे एहसास की हर वो दास्तां है..
आज कोई ग़म नही तुम्हे कभी छूता है..
मुझसे जुदा है तो हर लम्हा तेरा ही तेरा है..
तेरे लफ्जो मे अब और ही नाम सजा है..
मै मिट गयी इक तेरे ग़म मे और तू खुश हर लम्हा है..
सुन्सान राहों मे अब परछाइयां भी दिखती कहां है..
बस पतियों की छुपी सरसराहट ही देती सुनाइ यहां है..
तेरी मुस्कुराहट पे जो रंग नया है
आज महसूस हुआ हमने वो खोया था जो मेरा कहां है..
इक पल के लिये जिसे भूली नही वो मुझे भुला बैठा है..
यकिन नही सांसो का बंधन भी कितना झूठा है..
बिन तेरे टूटता नही और बोझ सी जिन्द्गी जी रहा है..
कितना लिखू दास्तान दर्द के अपने मुझे कोई अब पढनेवाला कहां है..
खतम हो चुकी जो कहानी उसकी परवाह किसे यहां है..
दिल धड़कना ही काश बंद कर देता जब इसका कोई खयाल करता ही कहां है..
मुझे मालूम नही जो है नही उसका जिक्र क्यू मेरे अल्फाजो मे हुआ है..
बस इतना मुझे पता कुछ तो टूटा इस कदर है जिसका दर्द हमे ज्यादा हुआ है..
तू खुश रहे मेरी दुआ लेकिन इक इल्त्जा दुर नजरो से भी तेरा रहना जरुरी सा लगा है..
तेरे अंदर अब वो जज्बात नही जिसे हमने अपना समझ लिया है..
अब तू किसी और का हिस्सा है बस मुझसे जुडा इक तेरी मुहबत का किस्सा है..
जिसे सदियो पहले हमने दफ़न कर दिया है..
तुझसे मिलके भी आज मुझे बस लगा तू इक बिता बस लम्हा है..
तुझसे जो भी जुडा है आज खतम हमने कर दिया है..

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