तिनका तिनका लाके कभी था घर हमने भी बनाया
इक हवा के जोर से थोडा दिल था घबराया
फ़िर भी दिल को एतेबार था संग सदा रहेगा अपनो का हमपे साया
मौसम की खुमारी क्या बदली बिखरा हुआ जरा जरा हमने पाया
कुछ थे इतने टूटे की हाथो से हमने समेट नही पाया
दर्द भी थे इतने की अश्को से ही हमने कुछ बहा डाला
आशिया बनाते बनाते हमने खुद को बेघर बना डाला
दीवारो सी उंची अमानते थी वो भी हमने चंद लम्हो मे गवाया
आज खाक होके खुद को राख सा हमने पाया
सुलग रहा किस चिंगारी से धुआ धुआ मिलो फैला हमने पाया
कब्तलक बुझेगी ये आग जिसमे जला मेरा जाहां
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
गुरुवार, 9 अप्रैल 2015
घर
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