कितनी तकलीफ़ से गुजरती है मेरी रातें...
क्या बताऊ अंजान लगती है खुद की ही सान्से..
मजबूर दिल ग़मगिन नैना और सिसकति रातें
कुछ तो अश्क बहा ले जाते और कुछ अनकही बातें
बिन तुम्हारे कुछ बदला नही रह गयी थी जो संग मेरे बस तेरी यादे..
खामोशी है चारो तरफ़ अपने कोइ शोर नही यहा होते..
कुछ टूट गये कुछ रुठ गये खत्म हुये सारे रिश्ते नाते..
तन्हा अभी सफ़र चलना बाकी है बिन तेरे
बहुत देखे हमने अबतक दुनिया के मेले
अगर थकन जिन्द्गी की पल दो चार मान्गे
कहनी होगी मुझे तुझसे तो हमने मौत मान्गी है
पल दो पल नही मेरी तो सारी जहां तेरी है
इन्तेजार खतम हुई अपनी अब तो सान्सो का आना जाना ही बाकी है
जब भी जरुरत हो आवाज़ तो लगाना तेरे कदमो मे अपनी जान रख दी है
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
गुरुवार, 9 अप्रैल 2015
तकलीफ़
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