सब कुछ भूला के अपनाया था जिसे आज वो ही सवाल कर रहा..
जिसे जिन्दगी ने मिलाया था मुझे आज वो ही जुदा हो रहा ..
लकिरों से किस्मत से हमने लिखी नही फिर क्यू कोई मिटाने लगा मुझे..
तकदिर का लिखा कुछ ऐसा जिसे हमने थामा उसने ही गिराया मुझे...
किस उलझन मे है मेरी जिन्द्गी गुजर रही क्या बताउ सब खो के भी रहना है जिन्दा हमे..
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
शनिवार, 13 दिसंबर 2014
उल्झने
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