शनिवार, 13 दिसंबर 2014

बेशक मै तुझमे शामिल नही
मुझसे दुर रहकर तुझे भी कुछ होगा हासिल नही
यकिन है मुझे भी अपने से ज्यादा तुझपे
उमर नही गुजारी हमने युही तेरे पनाहो मे
जो जिद्द कर ही ली तो कर के देख लो
आइने मे मुझे देख सवाल न करना
मेरे न होने पे एतेराज न करना
जो फैसला तुमने लिया है उसपे कभी अफ़सोस न करना
मै न रहुगी ना ये पल
तो तन्हाइ मै खुद को अकेला न कर लेना
मुझे तो आदत सी हो गयी तुम तो नये हो अभी आवाज सुनसान राहो मे ना देना
कोई न होगा तुम्हारी सिस्कियो के अलावा
लौटना भी ना तुम्हे शायद मुमकिन होगा
समेट रही खुद का आशिया तो
आज वो फ़िर पुराना बसेरा याद आ रहा
तुम्हे दुआ करूगी न मिले ये विराने
जिसमे हम अपनी खुशिया सजाने है चले
तुमसे मिलके जो हमने खोया काश वो तुम हमे लौटा देते

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