आहिस्ता आहिस्ता दिल तुझसे दुर हो रहा
कुछ अंदर ही अंदर टूट रहा
तेरा ग़म तो पहले भी था फिर आज क्यू
दिल इतना रो रहा
सब कुछ तो पहले ही खोया था क्यू
आज ये बेचैन कर रहा है
मन इतना क्यू ख्वाइश कर रहा
जब कोई अपना छूट रहा है
मुझे बेशक उसने खुद मे शामिल किया नही
फिर क्यू उस से अपना वजुद जुडा लग रहा है
किस बात की सजा ली हमने भी
जब अपनी ही किस्मत मे लिखी न खुशी
फिर क्यू रोने से शिकवा दिल कर रहा है
है नही जो अपना उसे अपना कहने का जिद्द क्यू कर रहा है
बहुत अलग है जमाना मुझसे फिर क्यू खुद को तबाह कर रहा है
मुझे बस इतना बता दे दिल क्या खता मेरी
जो आज खामोश तू मुझे गुनहगार समझ रहा है
मेरी तन्हाइ को भी क्यू तू रुसवा कर रहा है
मिटना अगर नसीब मे न लिखा होता
तो तू अपना नाम क्यू मुझसे अलग कर रहा है
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014
आहिस्ता आहिस्ता
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