तुझे भुल के सांस भी ना शायद आयेगी..
तुम्हे चाह के इस कदर चाहत मेरी पूरी हुई..
कैसे भुल के इल्जाम लगाया तुमने..
मुझे ही शायद न आई साथ निभाने..
तेरे ग़म मे खुद से हो गयी है नफ़रत..
कैसे जिउन्गी लेके तेरी उल्फत..
खता मेरी इतनी है गलतफहमी मे जो हुई है..
तुम भुल नही सकते उसे और मै भुल नही सकती तुम्हे..
क्या करू तुमसे मिलने की गुजारिश या रूसवाइ तेरी याद रखू..
दिल मजबूर है तेरे आगे और और मै अपनी गुनाहो के आगे..
सच बहुत तकलीफ़ है इस मुहब्बत मे..
दोस्ती पे इतना था गुमान अपने..
हमने सोचा ही नही दर्द भी कभी देंगे तुम्हे इतने..
अब जो दी है उसे देख नही सकती..
तुम्हे खुद से जुदा भी कर नही सकती..
नही पता क्या हल है इस मुस्किल का..
बस सहा न जा रहा दर्द इन दर्द भरे लम्हो का..
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014
दर्द
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