खबर ना लगी कब तेरा साथ मेरे दामन से छूट गया
कब बेखबर तु मुझसे इस कदर रूठ गया
क्या कहकर मनाऊ तुझे दिल तुझसे हार गया
रो रो के आन्शू भी सुख गये दर्द कुछ इस कदर हुआ
लौट भी आओ अखिरी है तुझसे चाहत मेरी देखो सब कुछ लुट गया
राह मुश्किल है अब गिर गयी हू तो एक बार सम्भाल लो शायद कुछ मुझे हो गया
तेरे नाम से नजरे उठी तु क्यू नजरो से मेरे छिप गया
आस तेरी ही अब इक बार तो मान जाओ कि तेरे बिना सब रूठ गया
ऐ बेखबर खबर तो दे क्यू है खामोश क्या तेरे दर पे आना मना हो गया
सुन तो ले दिल की गुजारीश तेरे बिना मेरा कुछ न रहा
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
सोमवार, 15 दिसंबर 2014
खबर
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