बादल सा कुछ नसीब लिखा ऊपर वाले ने अपना
कभी भटकना तो कभी बरसना यहा
तेरे अरमान बहुत होंगे मेरे नसीब पे हसने वाले
कभी तो बरसेगी तेरे भी नैनो से बरसाने वाले
इक रात गुजर जाये तेरे घने काली सायों के अन्धेरो के
फिर हम भी देखेंगे इन्साफ़ करने वाले
मेरे ग़म से वास्ता न रहे किसी का ये दुआ हम भी मांगने वाले
वो क्या जुदा करेंगे हम उन्हे खुद मुबारक खुशी के उन्हे करने वाले
मुकद्दर से बैर नही जब अपनो ने ही नजरो मे बैर समझ लिया
अपनी हकिकत पे हमने भी आज किस्सा तमाम कर दिया
लोग क्या कत्ल करेंगे हमने खुद का कत्ल ए आम सरेआम कर दिया..
भटकते रहेंगे तेरे ग़म मे लिखने वाले तेरे दर पे बरसना नैनो ने स्वीकार कर लिया
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
रविवार, 21 दिसंबर 2014
बादल
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