शनिवार, 13 दिसंबर 2014

बिखर गये पल

एक तेरी खवाइश मे टूट गयि मै
कुछ ही पल मे बिखर गयी मै
साथ तेरा हुआ नही तेरे जुदा होने से इक साथी खो दी मै
कितनी दूर हू तुझसे कब तेरे पास ही थी मै
क्या शिकवा करु जब अपनो मे शामिल ही नही मै
मेरे होने का तक्कल्लुफ़ ना उठाया करो तुमसे दूर जा रही मै
मेरे आन्शू तुम्हे दिखते नही अब हम भी दिखे न कभी इस ओर चली मै
तेरे वास्ते ही खुशी थी उसे ही तुम्हे लौटाने चली मै
मुझे कुछ मिला नही तुम्हे कुछ मिले इस कोशिश मे निकल चली मै
मेरे होने का इतना  ग़म तुम्हे तो नही रहना तेरे ग़म मे शामिल मुझे
मै हु जो तो तुमसे दूर तो खुशी हो शायद हासिल तुम्हे
अब कोई शिकायत नही तुझसे क्युकि नही हू तेरे वजुद मे कहीं मै

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