नादान था दिल भी कितना जो तुम्हे सब कुछ समझता था..
कभी आशू तो कभी मुस्कुराहट तुम संग बाटा करता था..
तेरे लिये हर पल बेचैन रहता था
उसकी ही सजा मिली तो क्यू नादान समझता नही..
जो किया वो क्यू भुलता नही
कैसे बताउं जो दिखते वो सच होते नही
जिसकी चाहत उसे वो यहां मुमकिन नही
फिर सीख ले तू भी चलना जो मिले वो तेरा नही
सब कुछ खोना और कुछ ही पाना मुकद्दर तेरी
नादान दिल तेरी खवाहिशे ऐसी नैनो मे हरपल नमी रही
अब तो खतम कर खवाबो का कारवा पूरा जो कभी होगा नही
Hi!Friends i am writing myself...This is my first blog and sharing with you my feelings... Hope you'll like it..!i!i!__N@IN@__!i!i!
शनिवार, 13 दिसंबर 2014
नादान
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