रविवार, 14 दिसंबर 2014

Sukun

तुझसे जुदा होके मुझे सुकुन न मिलेगा
तुझे रुलाके खुशी का कोई एहसास न होगा
मेरे गलती की सज़ा इतनी न दो
तेरा ग़म मुझे कभी जीने न देगा
क्या कहू  तुझे मेरे दर्द का वो लम्हा
जिसे सुन ने वाले भी कोई नही
बेशक चले जाओ जो मेरा हो नही
उसकी क्या खवाइश करू
तेरे होके भी  तेरी नही
खता मेरी इतनी सी तुझसे ही सब कुछ छुपाती रही
काश तुम समझ सकते क्या है हालत अब मेरी
माना हजारो शिकवे मेरे खातिर दिल मे तेरे
यकिन काश कर लेते तुम टूट गयी हू आज ईस हाल मे देख के मै तुझे
अब जिउंगी तेरे ही खवाइशो तले
माफ कर भी दो नही होगी कोई गुस्ताखी दिल से मेरे

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