रविवार, 21 दिसंबर 2014

बेशक

बेशक तू खफा खफा सा दिखता है..
तेरे नैनो मे मेरा ही ग़म झलकता है..
दिल के आइने मे मेरा ही अक्स रहता है..
इक बात बता मेरे बिना तू तन्हा क्यू जीना चाहता है..
तेरा साथ मुझे हर पल क्यू जरुरी सा लगता है..
नैनो के ख्वाबो का कोई ख्वाब अधूरा सा लगता है..
देखू तुम्हे तो क्यू मुस्कान मेरे चेहरे पे झलकता है ..
समझा ले दिल को तू इतना क्या ये सब बस तुझे बहलाना लगता है..
मुझसे दुर रहना तेरा मुझे बडा खलता है..
मेरे हर सवालो मे तेरा सवाल रहता है..
कुछ नही अगर तेरा मुझसे तू क्यू मेरा तू हिस्सा लगता है..
बेशक तेरे नजरो मे मेरा वजुद झूठा लगता है..
खुद से पुछ ले क्या तेरा क्या मेरा लगता है..
इन्त्जार नैनो का तेरे नैनो का रहता है..

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